Essay On Raksha Bandhan In Hindi For Class 6

रक्षाबंधन पर निबंध / Essay on Raksha Bandhan in Hindi!

भारत त्योहारों का देश है । यहाँ विभिन्न प्रकार के त्योहार मनाए जाते हैं । हर त्योहार अपना विशेष महत्त्व रखता है । रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक त्योहार है । यह भारत की गुरु-शिष्य परंपरा का प्रतीक त्योहार भी है । यह दान के महत्त्व को प्रतिष्ठित करने वाला पावन त्योहार है ।

रक्षाबंधन का त्योहार श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है । श्रावण मास में ऋषिगण आश्रम में रहकर अध्ययन और यज्ञ करते थे । श्रावण-पूर्णिमा को मासिक यज्ञ की पूर्णाहुति होती थी । यज्ञ की समाप्ति पर यजमानों और शिष्यों को रक्षा-सूत्र बाँधने की प्रथा थी । इसलिए इसका नाम रक्षा-बंधन प्रचलित हुआ । इसी परंपरा का निर्वाह करते हुए ब्राह्मण आज भी अपने यजमानों को रक्षा-सूत्र बाँधते हैं । बाद में इसी रक्षा-सूत्र को राखी कहा जाने लगा । कलाई पर रक्षा-सूत्र बाँधते हुए ब्राह्मण निम्न मंत्र का उच्चारण करते हैं-

येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबल: ।

तेन त्वां प्रति बच्चामि, रक्षे! मा चल, मा चल ।।

अर्थात् रक्षा के जिस साधन (राखी) से अतिबली राक्षसराज बली को बाँधा गया था, उसी से मैं तुम्हें बाँधता हूँ । हे रक्षासूत्र! तू भी अपने कर्त्तव्यपथ से न डिगना अर्थात् इसकी सब प्रकार से रक्षा करना ।

आजकल राखी प्रमुख रूप से भाई-बहन का पर्व माना जाता है । बहिनों को महीने पूर्व से ही इस पर्व की प्रतीक्षा रहती है । इस अवसर पर विवाहित बहिनें ससुराल से मायके जाती हैं और भाइयों की कलाई पर राखी बाँधने का आयोजन करती हैं । वे भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं तथा राखी बाँधकर उनका मुँह मीठा कराती हैं । भाई प्रसन्न होकर बहन को कुछ उपहार देता है । प्रेमवश नया वस्त्र और धन देता है । परिवार में खुशी का दृश्य होता है । बड़े बच्चों के हाथों में रक्षा-सूत्र बाँधते हैं । घर में विशेष पकवान बनाए जाते हैं ।

रक्षाबंधन के अवसर पर बाजार में विशेष चहल-पहल होती है । रंग-बिरंगी राखियों से दुकानों की रौनक बढ़ जाती है । लोग तरह-तरह की राखी खरीदते हैं । हलवाई की दुकान पर बहुत भीड़ होती है । लोग उपहार देने तथा घर में प्रयोग के लिए मिठाइयों के पैकेट खरीदकर ले जाते हैं ।

श्रावण पूर्णिमा के दिन मंदिरों में विशेष पूजा- अर्चना की जाती है । लोग गंगाजल लेकर मीलों चलते हुए शिवजी को जल चढ़ाने आते हैं । काँधे पर काँवर लेकर चलने का दृश्य बड़ा ही अनुपम होता है । इस यात्रा में बहुत आनंद आता है । कई तीर्थस्थलों पर श्रावणी मेला लगता है । घर में पूजा-पाठ और हवन के कार्यक्रम होते हैं । रक्षाबंधन के दिन दान का विशेष महत्त्व माना गया है । इससे प्रभूत पुण्य की प्राप्ति होती है, ऐसा कहा जाता है । लोग कंगलों को खाना खिलाते हैं तथा उन्हें नए वस्त्र देते हैं । पंडित पुराहितों को भोजन कराया जाता है तथा दान-दक्षिणा दी जाती है ।

रक्षाबंधन पारिवारिक समागम और मेल-मिलाप बढ़ाने वाला त्योहार है । इस अवसर पर परिवार के सभी सदस्य इकट्‌ठे होते हैं । विवाहित बहनें मायके वालों से मिल-जुल आती हैं । उनके मन में बचपन की यादें सजीव हो जाती हैं । बालक-बालिकाएँ नए वस्त्र पहने घर-आँगन में खेल-कूद करते हैं । बहन भाई की कलाई में राखी बाँधकर उससे अपनी रक्षा का वचन लेती है । भाई इस वचन का पालन करता है । इस तरह पारिवारिक संबंधों में प्रगाढ़ता आती है । लोग पिछली कडुवाहटों को भूलकर आपसी प्रेम को महत्त्व देने लगते हैं ।

इस तरह रक्षाबंधन का त्योहार समाज में प्रेम और भाईचारा बढ़ाने का कार्य करता है । संसार भर में यह अनूठा पर्व है । इसमें हमें देश की प्राचीन संस्कृति की झलक देखने को मिलती है ।

रक्षाबंधन का त्यौहार | About Raksha Bandhan in Hindi

रक्षाबंधन का त्योहार हर साल श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इसके पहली वाली पूर्णिमा गुरु-पूर्णिमा थी, जो गुरु और शिक्षकों को समर्पित थी| उसके पहले बुद्ध पूर्णिमा थी, और उसके भी पहले चैत्र-पूर्णिमा थी|तो इस चौथी पूर्णिमा को श्रावण-पूर्णिमा कहते हैं, और ये वाला पूरा चाँद भाई-बहन के प्रेम और कर्तव्य के सम्बन्ध को समर्पित है।

रक्षाबंधन २०१७|Raksha Bandhan 2017 Dates: ७ अगस्त २०१७

रक्षाबंधन का महत्व | Importance of Raksha Bandhan in Hindi

रक्षाबंधन पर आप राखी बांधते हैं, जिसे हम दोस्ती का धागा भी कहते हैं। यह नाम तो अंग्रेज़ी में अभी रखा गया है, लेकिन रक्षा बंधन तो पहले से ही था| ये एक रक्षा का रिश्ता है, जहाँ बहन भाई की रक्षा करती है|

इसलिए, रक्षा बंधन ऐसा त्यौहार है, जहाँ सारी बहनें जाती हैं, और अपने भाइयों को राखी बांधती हैं और कहती हैं "मैं तुम्हारी रक्षा करूंगी और तुम मेरी रक्षा करो"। और ये कोई ज़रूरी नहीं है, कि वे उनके अपने सगे भाई ही हों| बल्कि, वे तो सभी को राखी बांधती हैं, और सभी उनके भाई बन जाते हैं| तो ये प्रथा इस देश में काफी प्रचलित है, और ये श्रावण पूर्णिमा का बहुत बड़ा त्यौहार है। आज ही के दिन यज्ञोपवीत बदला जाता है।

रक्षाबंधन पर राखी बांधने की हमारी सदियों पुरानी परंपरा रही है। प्रत्येक पूर्णिमा किसी न किसी उत्सव के लिए समर्पित है। सबसे महत्वपूर्ण है कि आप जीवन का उत्सव मनाये। सभी भाईयों और बहनों को एक दूसरे के प्रति प्रेम और कर्तव्य का पालन और रक्षा का दायित्व लेते हुए ढेर सारी शुभकामना के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाना चाहिए।

अगले पांच सालों के लिए रक्षाबंधन उत्सव की तारीख पता करें | Know the dates for Raksha Bandhan festival for next five years

२६ अगस्त २०१८रविवार
१५ अगस्त २०१९गुरूवार
३ अगस्त २०२०सोमवार
२२ अगस्त २०२१रविवार
१२ अगस्त २०२२शुक्रवार

यज्ञोपवीत (जनेऊ) का संदेश और बदलने का महत्व

आपको ये याद दिलाना कि आपके कन्धों पर तीन जिम्मेदारियां या ऋण हैं – माता-पिता के प्रति ज़िम्मेदारी, समाज के प्रति जिम्मेदारी और ज्ञान के प्रति जिम्मेदारी|ये हमारी तीन जिम्मेदारी या ऋण हैं| हम अपने माता-पिता के प्रति ऋणी हैं, हम समाज के प्रति ऋणी हैं, और हम गुरु के प्रति ऋणी हैं; यानि ज्ञान के प्रति| तो ये तीन प्रकार के ऋण हैं, और यज्ञोपवीत हमें इन तीन जिम्मेदारियों की याद दिलाता है|

जब हम कहते हैं ‘ऋण’ – तो हमें लगता है कि ये कोई कर्जा है जो हमें वापिस करना है| लेकिन हमें इसे एक जिम्मेदारी के रूप में समझना चाहिये| तो इस सन्दर्भ में ऋण का क्या अर्थ है? जिम्मेदारी! यह है अपनी जिम्मेदारियों को पुनः याद करना, पिछली पीढ़ी के प्रति, आने वाली पीढ़ी के लिए और वर्तमान पीढ़ी के लिए| और इसी लिए, आप धागे को तीन बार लपेटते हैं।

यही इसका महत्व है – मुझे अपना शरीर शुद्ध रखना है, अपना मन शुद्ध रखना है और अपनी वाणी शुद्ध रखनी है; शरीर, मन और वाणी में पवित्रता| और जब आपके चारों ओर एक धागा लटका रहता है, तो आपको हर दिन ये याद आता है – “ओह, मेरी ये तीन जिम्मेदारी हैं”|

पुराने दिनों में महिलाओं को भी ये धागा पहनना होता था| ये केवल एक जाति या किसी और जाति तक ही सीमित नहीं था| इसे हर एक कोई पहनता था – फिर चाहे वो ब्राह्मण हो, वैश्य, क्षत्रिय या शुद्र; लेकिन बाद में यह सिर्फ कुछ लोगों तक ही सीमित रह गया।

तो इस दिन, जब ये पवित्र धागा (जनेऊ) बदला जाता है, तो इसे एक संकल्प के साथ किया जाता है, कि “मुझे शक्ति प्रदान हो, कि मैं जो भी कर्म करूँ वे कुशल और श्रुत हों”| कर्म करने के लिए भी किसी को योग्यता चाहिये| और जब शरीर शुद्ध हो, वाणी शुद्ध हो और चेतना जागृत हो, तभी काम पूरा होता है|

ऐसा कहा गया है, कि किसी को काम करने के लिए, चाहे वे आध्यात्मिक हो या फिर सांसारिक काम, उन्हें कुशलता और योग्यता जरूरी है और इस कुशलता और योग्यता को पाने के लिए, आपको जिम्मेदार होना पड़ेगा| केवल एक ज़िम्मेदार व्यक्ति ही काम करने के लायक है| कितना सुन्दर सन्देश दिया गया है|और यज्ञोपवीत संस्कार – माने ये सीखना कि जिम्मेदारी कैसे ली जाती है|

जनेऊ (पवित्र धागा) को सिर्फ ऐसे ही नहीं बदल देना चाहिये| जीवन में जिम्मेदारियां होती हैं| तो इसे सजगता और संकल्प के साथ बदला जाता है कि “मैं जो भी करूँ, उसे जिम्मेदारी के साथ करूँ”

रक्षाबंधन वीडियो| Video on Raksha Bandhan

अधिक जानकारी के लिए या प्रतिक्रिया देने के लिए संपर्क – webteam.india@artofliving.org

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